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Santosh Goyal

Born in an era when India was struggling under the British rule, Santosh had a fiercely independent spirit. A fighter, a leader, a teacher, a friend, a wife, a mother, she encompassed all these roles into her writings. A woman, who knew what she wanted and who willed her way to get it.
Tragedy has a way of making its presence felt in life and of catching one unaware. The pain, the melancholy, the helplessness, and the frustration poured into her compositions. Though she was never shy of voicing her opinions, she now found the expression through her prose and verses. With many books to her credit, she is a writer who has been honored with numerous awards. She continues to strive towards her passion with zeal.

She is one of the most gifted writers in Hindi, who has written more than forty books which talk about women's freedom and their rights and duties. Her books have helped create an awareness in the society. Her books have humor and are satirical, focusing on the many hierarchical levels of this patriarchal society and it's inherent psychology. 

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Story

अंगार तथा अन्य कहानियाँ 

संतोष गोयल की कहानियाँ परंपरागत सांचे की चिंता नहीं करती.उनमे न आदी है न अंत ,बस एक स्थिति है, एक जीवंत चित्र है जो पाठक के अंतर को उद्वेलित करता है ,उसे सोचने तथा समझाने को विवश करता है।

कोनाझरी केतली

कोनाझरी केतली

कोनाझरी केतली में स्री की बेबसी, असहायता उभरती है। परिवार में स्त्री की िस्थति क्या है ?  मानव मन के भीतर गहरे झांकती ये कहानिया जीवन के यथार्थ को पकड़ने में समर्थ हैं. यही वे सच है जो इन्सान खुद नहीं जान पाता।

Story

चर्चित कहानियाँ

'संतोष गोयल की कहानियां परम्परागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं अत: बनावटीपन से मुक्त है .इन कहानियों में वातावरण ही कहानी बन जाता है और पाठक को पता भी नहीं चलता तथा कहानी ख़त्म हो जाति है।

जड़े कहानी

 जड़ें  तथा अन्य कहानियाँ 

जड़ें कहानी जिसका फिम्लिकरण किया जा रहा है वह कहानी भारतिय संस्कृति की संकरी होती गलियों के सच की कहानी है। 



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बुक नेस्ट

संतोष गोयल की कहानियां परम्परागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं अत: बनावटीपन से मुक्त है .इन कहानियों में वातावरण ही कहानी बन जाता है।


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Poetry

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संतोष गोयल के इन तीनों उपन्यासों में कुछ तथ्य समान रूप से उभरते दिखाई देते हैं। तीनों उपन्यासों में मां का चरित्र अत्यंत विश्वसनीय और प्रामाणिक बन पड़ा है। वह आदर्श पात्र नहीं है-सामान्य मानवी है जो प्रेम, ममता, करूणा के साथ-साथ क्रोध, ईष्र्या एवं घृणा को भी अपने भीतर समेटे है। अनेक स्थलों पर वह नायिका के विरोध में खड़ी दिखाई देती है लेकिन इसके पीछे आमतौर पर अपनी संतान के प्रति उसकी चिन्ता छिपी होती है। नायिकाओं का अपनी मां के साथ संबंध भी यथार्थ की ठोस धरती पर निर्मित हुआ है। मां के व्यवहार से कुढ़ती, क्रोधित होती और उसे समझ कर उसके प्रति पे्रम से सिक्त नायिका इन उपन्यासों में सर्वत्र दिखाई देती है।
तीनों उपन्यासों में पिता पुत्री के प्रति अधिक संवेदनशील और कोमल दिखाई देता है लेकिन पत्नी के चरित्र से दबा हुआ प्रतीत होता है। वह पढ़ा-लिखा व्यक्ति है, हर घटना और व्यक्ति को भीतर तक समझता है लेकिन ऊपरी तौर पर निरपेक्ष बना रहता है। पत्नी का व्यक्तित्व और परिवार दोनों प्रबल दिखाए गए हैं जिसमें तटस्थ रहकर जीना पति को सुभीते का काम महसूस होता है।
कहा जा सकता है कि संतोष गोयल ने अपने उपन्यासों में भारतीय मध्यवर्ग की सामाजिक-नैतिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति का यथार्थ एवं कलात्मक अंकन किया है। समाज की नब्ज़ पर हाथ रखने के अतिरिक्त सकारात्मक दिशा की ओर संकेत भी इन उपन्यासों में विद्यमान हैं।


Santosh Goyal

vkykspuk

Santosh Goyal
computer

कम्प्यूटर एक सरल अध्ययन

Jansampark

जनसम्पर्क और विज्ञापन 

Kuch Prashan

इक्कीसवीं सदी: कुछ प्रश्न 

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 इस कोष ग्रथ का मूल उद्देश्य है - उन कृतिकारों की कृतियों की रक्षा करना जिन्हें कल चक्र विस्मृति के अन्धकार में बड़े वेग से छिपाता चला जा रहा है . उन्नीसवी शती की बात ही क्या ,बीसवीं शती की भी कितनी महत्वपूर्ण उपन्यास कृतिया अप्राप्य होती चली जा रही हैं अथवा पन्ने जीर्ण शीर्ण हो रहे हैं| इसा कोष का दूसरा प्रयोजन है शोधार्थियों के लिए शोध सामग्री खोज निकालना . शोध के लिए इसमें प्रचुर मात्र में सामग्री विद्यमान है. इस कोष ग्रथ द्वारा हिंदी के प्रथम उपन्यासकार की स्थिति भी स्पष्ट हुई है. कोष ग्रथ के प्राम्भ में कतिपय संकेत दिए गए हैं और अंत में परिशिष्ट है जिसमें इस ग्रन्थ की उपादेयता बढ जाती है. इस कोष के कतिपय उपन्यास कारों की कृतियों के कथांश पदने से मुझे यह प्रतीति हो रहा है की संपादक ने खुले मस्तिष्क से शोध किया है. मैं संपादक को साधुवाद देते हुए भविष्य के लिए मंगलकामना करता हूँ |

Santosh Goyal

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हिंदी उपन्यास कोश खण्ड-3

Hindi Novels

हिंदी उपन्यास कोश खण्ड-1 

हिंदी उपन्यास कोश खण्ड-2 

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