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नामवर सिंह जी 'बुक्नेस्ट' कहानी संग्रह

'संतोष गोयल की कहानियां परम्परागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं अत: बनावटीपन से मुक्त है | इन कहानियों में वातावरण ही कहानी बन जाता है और पाठक को पता भी नहीं चलता तथा कहानी ख़त्म हो जाति है | 'इंतजार करो वकत का' तथा ' बुक्नेस्ट दू कहानियां विशिष्ट और उल्लेखनीय है | दोनों के शीर्षक अत्यंत सार्थक और आकर्षक है | यह शीर्षक कहानियों का शिल्प भी निर्मित करते हैं | दोनों कहानिया उद्देश्य पूर्ण हैं, जीवन में जितना साफ सुथरा जरुरी है उतना ही गन्दा भी |  यह गंदगी ही है जो तुलना में दुसरे को अच्छा बनता है| संतोष की कहानिया गंदगी और दुःख दोनों से न घबराने का सन्देश देती हैं | वकत बदलता रहता है अत: उसका शांति पूर्वक इंतजार करना चाहिए |
इन कहानियों की भाषा में आंचलिकता का पुट इन्हें अनूठी आत्मीयता देता है.यह कहानियां आंचलिक नहीं किन्तु प्रत्येक प्रदेश की भाषा और शर्ति से जुडी है | सच्चे अनुभवों की जीवंत और प्रभावशाली कहानिया लिखने के लिए संतोष जी को बधाई |

कहानी संग्रह पर

नामवर सिंह जी 'बुक्नेस्ट' कहानी संग्रह 

'संतोष गोयल की कहानियां परम्परागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं, अत: बनावटीपन से मुक्त है | इन कहानियों में वातावरण ही कहानी बन जाता है और पाठक को पता भी नहीं चलता तथा कहानी ख़त्म हो जाति है | 'इंतजार करो वकत का' तथा ' बुक्नेस्ट दू कहानियां विशिष्ट और उल्लेखनीय है | दोनों के शीर्षक अत्यंत सार्थक और आकर्षक है.| यह शीर्षक कहानियों का शिल्प भी निर्मित करते हैं |दोनों कहानिया उद्देश्य पूर्ण हैं | जीवन में जितना साफ सुथरा जरुरी है उतना ही गन्दा भी यह गंदगी ही है जो तुलना में दुसरे को अच्छा बनता है | संतोष की कहानिया गंदगी और दुःख दोनों से न घबराने का सन्देश देती हैं. वकत बदलता रहता है | अत: उसका शांति पूर्वक इंतजार करना चाहिए |
 इन कहानियों की भाषा में आंचलिकता का पुट इन्हें अनूठी आत्मीयता देता है | यह कहानियां आंचलिक नहीं किन्तु प्रत्येक प्रदेश की भाषा और शर्ति से जुडी है | सच्चे अनुभवों की जीवंत और प्रभावशाली कहानिया लिखने के लिए संतोष जी को बधाई | 

विष्णु प्रभाकर 'जड़ें 'कहानी संग्रह पर 


संतोष गोयल की कहानियाँ परंपरागत सांचे की चिंता नहीं करती उनमे न आदी है न अंत ,बस एक स्थिति है | एक जीवंत चित्र है जो पाठक के अंतर को उद्वेलित करता है | उसे सोचने तथा समझाने को विवश करता है | मस्तिष्क पर दस्तक देती हैं | भाषा की सहजता से वातावरण का निर्माण करती हैं | कहानियों में अनेक स्थल मार्मिक बन पड़े हैं जो तिलमिला चोट देते हैं, गनरी करते है | अंतर्मंथन के लिए विवश करती हैं| समाज के विभिन्न वर्गों से सम्बंधित ये कहानिया संतोष की लेखनी का स्पर्श प् कर विशिष्ट बन जाती हैं.उन्हें बधाई तथा भविष्य के लिए शुभकामनाएं |

कमलेश सचदेव 'कोनाझारी केतली 'पर 

संतोष की कहानिया मानव मन के कोने अतरों में भटकती ,भीतर छिपी रोशनियों और अँधेरी गलियों का सच सहजता से उभाती हैं |आपसी संबधों का बारीकी से अध्ययन करती हैं.| मानव मन के भीतर गहरे झांकती ये कहानिया जीवन के यथार्थ को पकड़ने में समर्थ हैं | यही वे सच है जो इन्सान खुद नहीं जान पाता. सरल व गतिमय भाषा के लिए लेखक को बहुत सी बधाई |

नामवर सिंह जी 'बुक्नेस्ट' कहानी संग्रह पर

संतोष गोयल की कहानियां परम्परागत कथानक की अवधारणा को तोड़कर निकली हैं अत: बनावटीपन से मुक्त है | इन कहानियों में वातावरण ही कहानी बन जाता है और पाठक को पता भी नहीं चलता तथा कहानी ख़त्म हो जाति है | 'इंतजार करो वकत का' तथा ' बुक्नेस्ट दू कहानियां विशिष्ट और उल्लेखनीय है | दोनों के शीर्षक अत्यंत सार्थक और आकर्षक है | यह शीर्षक कहानियों का शिल्प भी निर्मित करते हैं | दोनों कहानिया उद्देश्य पूर्ण हैं | जीवन में जितना साफ सुथरा जरुरी है उतना ही गन्दा भी यह गंदगी ही है जो तुलना में दुसरे को अच्छा बनता है| संतोष की कहानिया गंदगी और दुःख दोनों से न घबराने का सन्देश देती हैं | वकत बदलता रहता है अत: उसका शांति पूर्वक इंतजार करना चाहिए |
इन कहानियों की भाषा में आंचलिकता का पुट इन्हें अनूठी आत्मीयता देता है.यह कहानियां आंचलिक नहीं किन्तु प्रत्येक प्रदेश की भाषा और शर्ति से जुडी है .सच्चे अनुभवों की जीवंत और प्रभावशाली कहानिया लिखने के लिए संतोष जी को बधाई |

मृदुला गर्ग 'झूला' कहानी संग्रह पर 

पिछले वषों के कहानी लेखन में संतोष क़ि कहानियों को विशेष स्थान मिला है | वे बहुचर्चित रही हैं |इन कहानियों में व्यक्त मनोविज्ञान की और आलोचकों व् पाठकों का ध्यान विशेषतया आकर्षित हुआ है |कहानियों की भाषा अपनी सरलता तथा गतिशीलता के कारण आम पाठक को प्रभावित करती है | पाठक कोई भी हो कहानी पदने को विवश हो जाता है. इसी कहानियां लिखने के लिए संतोष को बधाई |

महेश दर्पण 

बुकनेस्ट' की कहानियां पढते हुए पाठक उनके साथ साथ स्वयं बहता है| क्योकि ये कहानिया जिन्दगी के विभिन्न पहलुओं व वर्गों की अलग अलग समस्याओं से अलग तरीके से साक्षात्कार करती हैं | इन्हें जीवन से रूबरू करने वाली सशक्त कहानिया कहा जा सकता है | जिन्दगी से दोचार होती ये कहानियां उसके हर पहलु से बाबस्ता होती है | सभी पात्रों के संघर्षमय जीवन का अन्तरंग पहचानती है तथा छू लेने वाली भाषा में बयां करती हैं | 'गिल्ट 'कहानी में आज तक भी समाज में पुत्र और पुत्री के अंतर का बयां है किन्तु बालमन के मनोविज्ञान का सच्चा चित्रण प्रभावित करता है | 'पाल्यूशन चेक ' में ध्वनि या धुंए के पाल्यूशन से भी अधिक खतरनाक है | मानव मन में फ़ैलता पाल्यूशन. संतोष की कहानी कहने का तरीका अत्यंत विशिष्ट है | आम लेखन परम्परा से हट कर है |

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दिनेश नंदिनी डालमिया 'झूला ' कहानी संग्रह पर 

दिनेश नंदिनी डालमिया 'झूला ' कहानी संग्रह पर झूला कहानी संग्रह कि कहानियां सुशिक्षित स्त्रियों की विकसित मानसिकता तथा उसके आस पास के समाज की संकीर्णताओं के बीच तालमेल बैठाने का असफल प्रयास करते हुए व्यक्तित्व के संत्रास की है | ये कहानियां कहानी न होकर अलग अनुभव है | संतोष अनुभवों और अनुभूतियो को स्मृतिबिम्बो के माध्यम से व्यक्त करती हैं | मानव मन के अंतर्जगत से सम्पर्क स्थापित करती हैं तथा लहरों सी उठती -गिरती तैरती सरल भाषा का प्रयोग करते हुए अनायास अंत को पकडती है जो अंत सा हो कार अभी अंत नहीं होता |

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