डॉ दशरथ ओझा --हिंदी उपन्यासकार कोष (१८७०--१९८०तक ) 
 इस कोष ग्रथ का मूल उद्देश्य है - उन कृतिकारों की कृतियों की रक्षा करना जिन्हें कल चक्र विस्मृति के अन्धकार में बड़े वेग से छिपाता चला जा रहा है | उन्नीसवी शती की बात ही क्या ,बीसवीं शती की भी कितनी महत्वपूर्ण उपन्यास कृतिया अप्राप्य होती चली जा रही हैं अथवा पन्ने जीर्ण शीर्ण हो रहे हैं |  इसा कोष का दूसरा प्रयोजन है शोधार्थियों के लिए शोध सामग्री खोज निकालना . शोध के लिए इसमें प्रचुर मात्र में सामग्री विद्यमान है | इस कोष ग्रथ द्वारा हिंदी के प्रथम उपन्यासकार की स्थिति भी स्पष्ट हुई है | कोष ग्रथ के प्राम्भ में कतिपय संकेत दिए गए हैं और अंत में परिशिष्ट है जिसमें इस ग्रन्थ की उपादेयता बढ जाती है | इस कोष के कतिपय उपन्यास कारों की कृतियों के कथांश पदने से मुझे यह प्रतीति हो रहा है की संपादक ने खुले मस्तिष्क से शोध किया है. मैं संपादक को साधुवाद देते हुए भविष्य के लिए मंगलकामना करता हूँ.|

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